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औरैया जिला के सबसे बड़े अधिकारी ने वो कर दिखाया जिसके लिए शायद हम और आप कभी सोच भी नही सकते। कथित रूप से अथाह ज्ञान का भंडार लेकर कुर्सी पर बैठे सबसे बड़े साहब की कलम ने काली स्याही से ऐसा सफेद झूठ लिख डाला जो इस समय जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। पेश है औरैया के डीएम द्वारा लिखी गई बिल्कुल सफेद झूठ की एक रिपोर्ट---

रिपोर्ट-- रवि कुमार शुक्ल- औरैया    यह है औरैया जिले के वह कई गांव जहां मनरेगा के तहत सैकड़ों मजदूरों को रोजगार दिया जा रहा है। कोरोना काल मे...



रिपोर्ट-- रवि कुमार शुक्ल- औरैया



 
 यह है औरैया जिले के वह कई गांव जहां मनरेगा के तहत सैकड़ों मजदूरों को रोजगार दिया जा रहा है। कोरोना काल में अपने वतन को आये प्रवासी और स्थानीय मजदूरों गांव में ही रोजगार देने के लिए मनरेगा के सहारा लिया जा रहा है। मनरेगा योजना मजदूरों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है। जिससे  मजदूर मजदूरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे है। जिले की 477 ग्राम पंचायतों में लगभग हजारों प्रवासी और स्थानीय मजदूरों को मनरेगा के तहत काम मिल है,  और सभी ग्राम पंचायतों में तालाबो , सम्पर्क मार्ग , और गड्ढे खोदने का कार्य चल रहा है।



 अब बात करते है जिले के मुखिया के अजीबो-गरीब कारनामे की। 46 डिग्री सेल्सियस के ताप में दो जून की रोटी के लिए मजदूर हाड़तोड़ परिश्रम कर रहे हैं तो डीएम साहब एसी कमरे में बैठकर काली स्याही से सफेद झूठ लिख रहे हैं। जिले के कई गांवों में तालाब की खुदाई हो रही है इसमें कोई शक नहीं। किन्तु कई ऐसे भी गांव हैं जहां तालाब खोदा ही नहीं गया लेकिन औरैया डीएम अभिषेक सिंह ने कागजो में ही तालाब खोद डाला और अपनी झूठी कामयाबी की गाथा कमिश्नर से लेकर प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ को सुना डाली। इतना ही नही फर्जी फोटो के साथ साहब की  इस गुमशुदा  तालाब के कार्य के लिए ट्वीटर पर दर्जनों लाइक भी मिले हैं। इतने बड़े अफसर द्वारा शासन को भेजी गई फर्जी रिपोर्टिंग के पीछे का क्या मकसद है यह तो वही बता सकते हैं किंतु आम लोग इसे भ्रष्टाचार के रूप में ही देख रहे हैं। आइए पूरा मामला समझने की कोशिश करते हैं।
मामला है जनपद औरैया के अछल्दा ब्लॉक के अंतर्गत एली ग्राम पंचायत की जंहा पर मनरेगा योजना के तहत कार्य कराए जा रहे है। जिसमे मजदूरों को गाँव मे ही काम मिल रहा है। गाँव मे ,कच्चा सम्पर्क मार्ग और नाली खुदाई जैसे कार्य कराए गए है । लेकिन डीएम साहब मजदुरो से 10 कदम आगे निकल गए। साहब ने 54 मनरेगा मजदूरों द्वारा ग्रामपंचायत में ऐसा तालाब खुदवा डाला, जिसका दूर दूर तक कहीं नाम ओ निशान ही नहीं है। यानी बिना तालाब खुदे ही डीएम साहब ने कागज में अपनी कलम से ही तालाब खोद डाला। अपनी वाहवाही के लिए डीएम साहब ने फर्जी फोटो का भी सहारा लिया और वही फोटो शासन को भी ट्विटर के माध्यम से भेज डाली। डीएम औरैया के ट्वीटर हैंडिल पर तालाब और उसमे काम कर रहे मजदूर भी दिखाई दे रहे हैं।



 *इंडिया होंन की टीम* ने डीएम साहब के ट्वीटर पर दिख रहे तालाब की खोज की तो धरातल पर तालाब न हमारी टीम को दिखाई पड़ा और न ही ग्राम पंचायत के मजदूरों को । जब इस अदृश्य तालाब के बारे में हमने मजदूरों से पूछा तो क्या जबाब मिला सुनिए- --



इसके बाद भी हमारी टीम ने उस अदृश्य तालाब की खोज जारी रखी  , हमने गाँव के प्रधान की ओर रुख किया जब इस अदृश्य तालाब के बारे में पूछा तो प्रधान जी ने बताया ग्राम पंचायत एली में  कोई तालाब खुदा ही नही। सुनिए--



अब सवाल यह उठता है कि इतने बड़े अफसर ने शासन को फर्जी रिपोर्ट क्यों भेजी?


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