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शिकायत करना रिटायर्ड आर्मी कैप्टन के परिजनों को बेहद मंहगा पड़ गया।

 सुल्तानपुर में भट्ठा मालिक से रास्ता दुरुस्त करवाने की शिकायत करना रिटायर्ड आर्मी कैप्टन के परिजनों को बेहद मंहगा पड़ गया। हाल ये रहा कि भट्...



 सुल्तानपुर में भट्ठा मालिक से रास्ता दुरुस्त करवाने की शिकायत करना रिटायर्ड आर्मी कैप्टन के परिजनों को बेहद मंहगा पड़ गया। हाल ये रहा कि भट्ठा मालिक की शह पर न सिर्फ हिरासत में ले लिया गया बल्कि थर्ड डिगी भी इस कदर अपनाई गई जैसे वे बहुत बड़े मुजरिम हों। बाद में 151 के तहत चालान कर उन्हें छोड़ दिया गया। अब रिटायर्ड कैप्टन न्याय की आस में पुलिस विभाग का चक्कर लगा रहा है।

 दरअसल ये मामला है देहात कोतवाली क्षेत्र के पन्ना टिकरी गांव का। इसी गांव के रहने वाले रामनाथ पाठक आर्मी से रिटायर्ड कैप्टन हैं। लॉक डाउन के चलते इनके घर के सभी पढ़ने लिखने वाले बच्चे इस समय घर पर ही हैं। इनके पड़ोस गांव के रहने वाले श्याम नारायण इसी गांव में अपना ईंट भठ्ठा चलाते हैं। इसी ईंट भट्ठे के आगे रामनाथ पाठक का बाग़ है। लेकिन भठ्ठे के चलते ये रास्ता पूरी तरह खराब हो चुका है। बीते 18 जून को रामनाथ पाठक के बच्चे और भतीजे कुल 6 लोग अपने बाग़ गये हुये थे। वापस लौटते समय इन लोगों ने श्याम नारायण से फिर एक बार सड़क सही करवाने की बात कही। लेकिन रास्ता ठीक करवाने के बजाय ईंट भट्ठा मालिक से साफ़ मना कर दिया। जिसपर इनके बच्चे और भतीजों ने डायल 112 पुलिस को फोन कर दिया। लेकिन डायल 112 पुलिस आने से पहले ही भट्ठा मालिक ने थानाध्यक्ष देहात कोतवाली को बुला लिया और इनके परिवार के सभी 6 बच्चों को पीटते हुई गाड़ी पर बैठा कर थाने ले गई। थाने पर भी बाहर पढ़ने लिखने और नौकरी करने वाले इन बच्चों के साथ ऐसा सुलूक किया गया जैसे ये बहुत बड़े अपराधी हों। इनके साथ थर्ड डिग्री का प्रयोग करते हुई इनकी जमकर पिटाई की गई। आप भी देहात कोतवाली पुलिस की इस बर्बरता को देखिये, कि किस तरीके से इनके साथ सुलूक किया गया है।



 वहीँ इस बात की जानकारी जब रामनाथ पाठक को लगी तो ये भी थाने पहुंचे, लेकिन कोई सुनवाई न हुई। आखिरकार पुलिस ने बच्चों को छोड़ने के एवज में इनसे 15 हज़ार रुपए लिये और 24 घंटे बाद इनका 151 में चालान कर दिया गया। बाद में एसडीएम लंभुआ ने इन्हें जमानत पर छोड़ दिया। इसी की शिकायत करने रिटायर्ड कैप्टन आज पुलिस अधीक्षक के पास पहुंचे, लेकिन उनसे मुलाकात न हो सकी। हलाँकि सुल्तानपुर पुलिस द्वारा जारी व्हाट्सएप्प नम्बर पर उन्होंने अपनी शिकायत भेज दी है और न्याय की आस में लगे हुये हैं।




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