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🌷भीगी यादें🌷

  मौसम की एक करवट,न जाने कितने बदलाव अपने साथ ले आई है।समां कुछ ऐसा है कि पौधों ने हरी मुस्कान ओढ़ ली है।नीले अम्बर तले बादलों ने  दुरं...



  मौसम की एक करवट,न जाने कितने बदलाव अपने साथ ले आई है।समां कुछ ऐसा है कि पौधों ने हरी मुस्कान ओढ़ ली है।नीले अम्बर तले बादलों ने  दुरंगी अर्थात सफ़ेद और काले रंग की चादर तान ली है।चाँद तो ऐसा दिखने लगा है मानो अभी नहा कर आया हो।इधर मौसमी फलों ने स्वाद-सुगंध की खिड़की खोल दी है।हरी चटनी की चटख और उसकी शोख़ अदाएं ये तय ही नहीं कर पा रही हैं कि भुट्टा संग जाएँ या पकौड़ी की गोद हरी करें।
  आप भी सोच रहे होंगे कि मैं किसकी बातें कर रहा हूँ,तो जनाब! ये बरसात की बातें हैं जिसने पूरा माहौल ही बदल कर रख दिया है।झमाझम बरखा,काले बादलों से घिरा आकाश,शीतल पवन के झोंकों संग झूमता आँगन में लगा नीम का पेड़ और ठण्डी फुहारों के साथ उठती नीमकौड़ी की महक अजीब अहसास करा रही है।इन बावरी फुहारों ने बचपन की यादों का किवाड़ खोल दिया है।दोस्तों संग पानी में उछल-कूद,ताल-तलैया में मछली पकड़ने की जतन, मेंढकों के सामूहिक स्वर अभ्यास के दौरान उनके गालों को देखना,धान के बीजों की रखवाली में पंछियो से ज़ोर आज़माई व धान रोपाई के दौरान कीचड़ में सने रहना तथा अमरुद की चाह में पेड़ों पर बसेरा करना ऐसी यादें हैं जिन्हें एक बार फिर जी लेने को मन तरसता है।
  मगर आज कितना कुछ बदल गया है न!अब आमतौर पर बारिश की बूँदें खपरैल के बजाय कंक्रीट की दीवारों और उसमें लगे शीशों पर फिसलने लगी हैं,पकौड़ियों की जगह कॉफी ने ले ली है।हां! धानी सावन की निशानियों ने भले ही अपना स्वरूप बदल लिया हो लेकिन उससे जुडी भावनाएं आज भी नहीं बदलीं।खिड़की से देखता हूँ तो छज्जे से टपकती बूँदें दस-बारह बरस पहले मेरे घर की खपरैल याद दिलाती हैं और गाँव की भीगी सोंधी मिट्टी की महक का एहसास लिए मेरी भावनाओं से उलझती हैं।कुल मिलाकर ये एहसास ही तो है जो हरे मन को बरसात से बांधता है।मुद्दतें बीत जाएँ,गाँव का स्वरूप बदल जाए और रस्म व रवाज पर पाश्चात्य संस्कृति हावी होने लगे मगर सावन-भादो से जुड़े जज़्बात रूह से इस तरह घुल-मिल गए हैं कि उसकी तस्वीर कभी धुंधली नहीं पड़ती।ये वो ऋतु है जो हर वर्ग और आयु के लोगोँ की भावनाओं को एक सुर-ताल कर देता है।तभी तो बरसात की इस रुत में न जाने कौन सा रंग घुला है कि जो बावरे मन को बस नील गगन में उड़ चलने को कहता है.........

लेखक:नजमुस्साकिब अब्बासी नदवी
पुस्तक:यादों की रहगुज़र
पता:नया सवेरा फाउंडेशन
टीपू सुल्तान रोड़,रजदेपुर शहरी,ग़ाज़ीपुर,यूपी।



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