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तेज बहादुर यादव पहुंचे सैनिक के घर।

बीती 21 जुलाई की शाम 7:30 बजे के करीब पड़ोसियों के द्वारा लाठी डंडे तथा लोहे की रॉड से लैस होकर घर में घुसे दबंगों ने सैनिक के पिता...







बीती 21 जुलाई की शाम 7:30 बजे के करीब पड़ोसियों के द्वारा लाठी डंडे तथा लोहे की रॉड से लैस होकर घर में घुसे दबंगों ने सैनिक के पिता की हत्या कर दी थी जिसका संज्ञान लेते हुए आज  पिछले लोकसभा चुनाव में  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ वाराणसी से अपना नामांकन पत्र भरने वाले पूर्व सैनिक तेज बहादुर यादव ने अमेठी तहसील क्षेत्र के संग्रामपुर थाना अंतर्गत ग्राम शुकुलपुर पहुंचकर सैनिक व उनके परिजन को सांत्वना देते हुए उत्तर प्रदेश सरकार की कानून व्यवस्था को पूरी तरह फेल बताया ।इसी के साथ पूर्व सैनिक ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि यदि सरकार सैनिकों की सही-सही हमदर्द है तो उन्हें मृतक राजेंद्र प्रसाद मिश्र के परिजनों को 20 लाख रुपए मुआवजे के तौर पर देना चाहिए। जिससे परिवार का गुजर बसर हो सके । क्योंकि इन लोगों के पास जमीन भी नहीं है और सैनिक का आधे से ज्यादा वेतन पूर्व में लिए गए कर्ज को चुकाने में चला जाता है।

पीड़ित सैनिक की पिता हत्या के बाद शोक संवेदना व्यक्त करने तथा हालचाल जानने के लिए सैनिक के गांव पहुंचे बीएसएफ के पूर्व सैनिक तेज बहादुर यादव ने कहा की पुलिस ने जो कार्यवाही की है उससे हम संतुष्ट हैं। लेकिन उस कार्यवाही से क्या होगा? इनके पिता थे घर का खर्चा चलाते थे इनके घर की जो स्थिति है वह कुछ और है। यही वेतन पाते हैं और वेतन का एक बड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने में चला जाता है अब इनके परिवार को कौन खिलाएगा? यह सोचने वाली बात है इसके लिए सरकार को कम से कम आर्थिक मदद करनी चाहिए थी। ऐसे में कम से कम सरकार को 20 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देनी चाहिए। क्योंकि इन लोगों के पास ना तो जमीन है ना ही बहुत अच्छी आर्थिक स्थिति है ऐसे में जब सरकार कहती है कि हम सैनिकों को साथ हैं लेकिन जब सैनिकों का मामला आता है और सैनिक के परिवार के मदद का मामला आता है तो सरकार मुंह मोड़ लेती है आखिर ऐसा क्यों? उत्तर प्रदेश में ऐसे मामले बहुत से देखने को मिल रहे हैं । पिछले साल एक गुंडा पुलिस की गोली से मर जाता है सरकार ने उसको 5 लाख रुपए देते हैं और उसके परिवार को नौकरी दी है।  जबकि इनके परिवार की क्या गलती थी सरकार अगर सैनिक के परिवार का सम्मान करना चाहती है तो इस परिवार को भी सरकार को 20 लाख रुपए मुआवजे के तौर पर देना चाहिए। उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज ही नहीं रह गई है। कभी कहीं तो कभी कहीं पर हत्या हो रही है अभी एक पत्रकार की ही हत्या हो गई है इन सब की जिम्मेदार सरकार है । उत्तर प्रदेश सरकार ला एंड आर्डर के मुद्दे पर सरकार पूरी तरह से फेल है ।





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