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सहारनपुर मनरेगा में मजदूरी करते करते महिलाओं के हाथों में पडे छाले लेकिन नही हुआ मजदूरी का आजतक भुगतान।

 लाॅक-डाउन और कोरोना वायरस महामारी जहां मोदी सरकार द्वारा गरीब मजदूरों को सहायता देने का काम किया जा रहा है  वहीं कुछ भ्रष्ट अधिकारिय...





 लाॅक-डाउन और कोरोना वायरस महामारी जहां मोदी सरकार द्वारा गरीब मजदूरों को सहायता देने का काम किया जा रहा है  वहीं कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की वजह से मनरेगा में काम कर रही महिलाएं खाने के दाने दाने से हैं परेशान, इन परेशान मजदूर महिलाओं के घर चूल्हा तो जलता है लेकिन चूल्हे से सिर्फ खाली दुआ ही निकलता दिखता है,
...... जनपद सहारनपुर के ब्लॉक नकुड के गांव कपूरी में महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना में मजदूरों को रोजगार तो मिल रहा है लेकिन मनरेगा मजदूरों को उनकी मजदूरी का भुगतान नहीं हो रहा है।गांव की 10 से भी ज्यादा मनरेगा महिला मजदूरों ने जानकारी देते हुए बताया कि वे सभी लंबे समय से गांव में मनरेगा के तहत बड़ी मेहनत से मजदूरी कर रही हैं।मजदूरी करते करते उनके हाथों में छाले भी पड़ गए हैं लेकिन उन्हें उनकी मजदूरी का आज तक पूरा भुगतान नहीं हो पाया है।मनरेगा में मजदूरी करने वाली महिलाओं का कहना है कि मजदूरी के भुगतान के लिए वे सभी लगातार ग्राम प्रधान व ग्राम सचिव से मजदूरी दिलाने के लिए गुहार लगाती रही लेकिन उन्हें हर बार टरका कर भगा दिया गया।महिलाओं ने बताया कि परेशान होकर उन्होंने 5 जून को उप जिलाधिकारी नकुड को इस विषय में प्रार्थना पत्र दिया था जिसके बाद उनके खाते में दो या तीन बार मजदूरी के पैसे आए हैं।महिलाओं का आरोप है कि जून माह में जो पैसे उनके खाते में आए हैं उनमें से केवल 200 रुपये ही उन्हें मिले हैं बाकि के पैसे प्रधान ने उनसे वापिस ले लिये हैं।महिलाओं ने बताया कि जो पिछले वर्षों का उनकी मनरेगा मजदूरी का भुगतान है वह आज तक भी नहीं हो पाया है।महिलाओं का कहना है कि जब भी ग्राम सचिव व ग्राम प्रधान से मजदूरी के पैसों के बारे में पूछा जाता है तो वह हर बार यही कहते हैं कि सरकार ने अभी तक पैसे नहीं भेजे हैं।अभी कुछ दिन पहले महिलाओं ने जिलाधिकारी सहारनपुर से प्रार्थना पत्र देकर मनरेगा में उन सभी महिलाओं के द्वारा की गई मजदूरी का भुगतान कराए जाने की मांग की थी।मनरेगा में मजदूरी करने वाली एक महिला मजदूर संयोगिता ने अपनी माली हालत के बारे में बताते हुए कहा कि वह बेहद गरीब है।मनरेगा में की गई मजदूरी के पैसे न मिल पाने के कारण घर का खर्चा चलाना बहुत मुश्किल हो गया है।महिला ने बताया कि उसके पति अपाहिज हैं।घर में तीन लड़कियां और एक लड़का है।महिला ने यह भी बताया कि प्रशासनिक अधिकारियों, ग्राम प्रधान और ग्राम सचिव से बार-बार गुहार लगाने के बाद भी उसे मजदूरी का पैसा नही मिला।
वह अपने घर पर तिरपाल डालकर अपना गुजारा कर रही है।महिला का कहना है कि सरकार की तरफ से जितनी भी योजनाएं चल रही हैं केवल एक योजना के तहत उसे गैस चूल्हा मिला है।इसके अलावा उसे किसी योजना का कोई भी लाभ आज तक नहीं मिल पाया है।100 दिनों के रोजगार की गारंटी वाली मनरेगा योजना भले ही अर्थशास्त्रियों की नजर में सबसे कारगर हो लेकिन भ्रष्टाचार की वजह से गरीब मजदूरों के साथ इसमें बहुत बड़ा खेल होता है।



ब्यूरो रिपोर्ट-शमीम अहमद सहारनपुर



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