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किसान यूनियन की एक बैठक गांव कुडाना में हुई जिसमें किसानों से जुड़ी कई समस्याओं पर बात हुई बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी सवित मलिक ने कहा कि किसान बहुत परेशान हैं

किसान यूनियन की एक बैठक गांव कुडाना में हुई जिसमें किसानों से जुड़ी कई समस्याओं पर बात हुई बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी सवित मल...




किसान यूनियन की एक बैठक गांव कुडाना में हुई जिसमें किसानों से जुड़ी कई समस्याओं पर बात हुई बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी सवित मलिक ने कहा कि किसान बहुत परेशान हैं जहां गन्ने का भुगतान नहीं हो रहा है वही उर्वरक और डीजल के भाव बढ़ते जा रहे हैं किसान के पास पैसा नहीं है ऊपर से आने वाली फसल को आवारा जानवर खा जा रहे हैं आवारा पशु बड़ी संख्या में खेतों में घूम रहे हैं सरकार ने गौशाला बनाने का वादा किया था जो सफल होता नहीं दिख रहा है आवारा जानवर फसल ही नहीं होने देंगे तो किसान क्या करेगा किसान की हालत पहले से ही बहुत खराब है इसी का एक उदाहरण है की किसान खेती के उपकरण भी नहीं खरीद पा रहे हैं
केंद्र सरकार के तमाम दावों के बावजूद ग्रामीण अर्थव्यवस्था   और किसानों दशा सुधरने का नाम नहीं ले रही. कई राज्यों में फसलों का उचित दाम नहीं मिल रहा है और जिस हिसाब से महंगाई बढ़ रही है उनकी इनकम ग्रोथ नहीं हो रही. गांवों और खेती-किसानी के विकास का बड़ा इंडीकेटर माने जाने वाले ट्रैक्टर की साल दर साल घटती बिक्री इसकी तस्दीक कर रही है. हालांकि, इस स्थिति में सुधार हो इसके लिए लगातार कृषि उपज की एश्योर्ड प्राइस देने और पीएम किसान सम्मान निधि की रकम 48 हजार रुपये करने की मांग हो रही है.

क्या संदेश देते हैं ट्रैक्टर बिक्री के आंकड़े

ट्रैक्टर मेन्यूफेक्चरिंग एसोसिएशन के आंकड़ों के मुताबिक 2018 में घरेलू मार्केट में 7,96,392 ट्रैक्टर बिके थे. जबकि 2019 में यह घटकर 7,23,525 पर आ गया. इस साल यानी 2020 के छह माह में सिर्फ 3,07,485 ट्रैक्टर ही बिके हैं. किसान भाई ट्रैक्टर से जमीन जोतकर खेती के लिए तैयार करते हैं. यह खेतों में बीज डालने, पौध लगाने, फसल लगाने और फसल काटना, थ्रेसिंग सहित कई काम में आता है.
*किसानों के पास पैसा होता तभी तो खरीदेंगे*
कृषि अर्थशास्त्री  के मुताबिक ट्रैक्टर बिक्री का गिरता आंकड़ा रुरल डिस्ट्रेस की बात को पुख्ता करता नजर आ रहा है. इससे आप आसानी से समझ सकते हैं कि एग्रीकल्चर की स्थिति कितनी गंभीर है. किसानों की आय गिरती जा रही है. उन्हें अपनी उपज का उचित दाम तक नहीं मिल पा रहा. उनकी उपज रखने की जगह नहीं है. देश के 17 राज्यों में किसानों की सालाना आय सिर्फ 20 हजार रुपये है. जब किसानों के पास आय होगी तभी तो वो पैसा खर्च करेगा.


*किसान यूनियन अध्यक्ष सवित मलिक*  कहते हैं कि कृषि की विकास  की दर भी बहुत अधिक नहीं है. किसानों की आमदनी लगातार घट रही है. कई फसलों का जब तो न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तक नहीं मिल रहा. जब खेती घाटे का सौदा हो जाएगी तब कौन ट्रैक्टर खरीदेगा. गन्ना किसानों का भी बुरा हाल है. अकेले यूपी में ही 15 हजार करोड़ रुपये बाकाया है. पिछले दो साल से यूपी जैसे बड़े राज्य में गन्ने का एक भी रुपया नहीं बढ़ाया गया है. जबकि महंगाई बढ़ गई है.

जयपाल सिंह कहते हैं कि 12 जुलाई 2020 तक बुवाई 586 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जो पिछले साल 12 जुलाई तक 402 लाख हेक्टेयर ही थी. खाद की बिक्री 2019 की मई के मुकाबले 2020 की मई में 73 फीसदी ज्यादा है. जब यह सब बढ़ रहा है तो इस लिहाज से ट्रैक्टर की बिक्री काफी बढ़नी चाहिए थी. जबकि बढ़ी नहीं. इसका मतलब ये है कि किसान अपना ट्रैक्टर लेने की बजाय किराये पर काम करवा रहे हैं. क्योंकि उनके पास पैसा नहीं है.
ऋषि पाल मलिक को जिला उपाध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया  उपस्थित लोग अनिल मलिक ऋषि पाल मलिक जयपाल सिंह अंशुल कुमार जसवीर जय वीर परविंदर अंकुर रविंदर आदि



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