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सरकार और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते टूटा हुआ पुल लाखों लोगों की मुसीबत का बना सबब।

PLACE - AMETHI REPORT - DILEEP YADAV आइए हम बात करते हैं वीवीआइपी जनपद अमेठी की जो कभी नेहरू गांधी खानदान की विरासत के साथ कांग्र...





PLACE - AMETHI

REPORT - DILEEP YADAV

आइए हम बात करते हैं वीवीआइपी जनपद अमेठी की जो कभी नेहरू गांधी खानदान की विरासत के साथ कांग्रेस के गढ़ के रूप में जाना जाता था । आज यहां पर सांसद के रूप में भारत सरकार की केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी प्रतिनिधित्व कर रही है । लेकिन यहां की लाखों की आवाम पिछले डेढ़ वर्षो से आवागमन को लेकर परेशान और हैरान है । किंतु इस बात से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता है। जी हां हम बात कर रहे हैं अमेठी संसदीय एवं तहसील क्षेत्र की जहां के संग्रामपुर ब्लॉक मुख्यालय से से लगभग 500 मीटर की दूरी पर स्थित विशेश्वरगंज-संग्रामपुर-धौराहरा संपर्क मार्ग के नौवें किलोमीटर पर मालती नदी के ऊपर बना पुल पिछले डेढ़ वर्षो से क्षतिग्रस्त हो चुका है । साथ में आपको यह भी बता दें कि इस पुल का निर्माण सन 1983 में  तत्कालीन अमेठी सांसद एवँ पूर्व प्रधानमंत्री रहे स्वर्गीय राजीव गांधी के द्वारा जन सुविधा को दृष्टिगत रखते हुए बनवाया गया था । शायद इसी कारण से अभी तक इस छतिग्रस्त पुल का पुननिर्माण रूका हुआ है । क्योंकि अन्य कोई ठोस कारण समझ में नहीं आता है। जबकि भारतीय जनता पार्टी की स्थानीय विधायक रानी गरिमा सिंह ने इस पुल के पुनः बनाये जाने के लिए पिछले वित्तीय वर्ष में ही 2 करोड़ 2लाख 19 हज़ार रुपये का प्रस्ताव भेजा है किंतु आज तक शासन की स्वीकृति नहीं मिल पाई। विगत डेढ़ वर्ष पहले पुल क्षतिग्रस्त होने के तत्काल बाद लोक निर्माण विभाग के द्वारा आंशिक रूप से मार्ग को अवरुद्ध करते हुए बड़े वाहनों के साथ चार पहिया वाहनों के आवागमन पर भी रोक लगाने का बोर्ड लगा दिया गया। जिसके बाद से आज तक हजारों गांव के लोग लगातार परेशान हैं। क्योंकि इस रास्ते पर सिर्फ साइकिल और बाइक से निकल सकते हैं । किसी भी कीमत पर इस पुल से चार पहिया वाहन लेकर नहीं गुजर सकते हैं। इसमें सबसे बड़ी बात तो यह है कि उनके दूसरी साइड में पड़ने वाले सैकड़ों गांवों को संग्रामपुर में स्थित अपने ब्लॉक, थाना और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर आने के लिए 600 मीटर की दूरी को तय करने के लिए 6 किलोमीटर घूमना पड़ता है । ऐसे में बड़ी मुश्किल तो तब होती है जब इमरजेंसी में किसी पेशेंट को लेकर एंबुलेंस इधर से उधर घूमती है । यही नहीं संग्रामपुर में ही अमेठी जिले का सबसे पुराना और पौराणिक मंदिर मां कालिका का धाम कालिकन स्थित है । जहां पर कोरोना काल छोड़कर अन्य समय में प्रत्येक सोमवार को हजारों की भीड़ मां के दर्शन को आती थी। ऐसे में सभी का आवागमन बंद होने के चलते बड़ी ही मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है । जिस पर यहां की रहनुमाई कर रही अमेठी सांसद का ध्यान अभी तक नहीं गया और जनता त्राहिमाम त्राहिमाम कर रही है। जबकि यदि सांसद महोदया चाह लेती तो अभी तक इस पुल का निर्माण हो गया होता और जनता की समस्या खत्म हो गई होती । लेकिन कहीं ना कहीं उनके द्वारा भी यह उपेक्षित किया जा रहा है । जिसके चलते इतना समय बीत जाने के उपरांत आज तक यह स्थिति बनी हुई है।

इस संबंध में जब लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता राकेश कुमार चौधरी से बात की गई तो उन्होंने बताया कि। यह बात विभाग के संज्ञान में है इसका आगणन भी पिछले वित्तीय वर्ष में शासन को भेजा गया था किंतु कोविड-19 हमारी की वजह से हुए लॉकडाउन या किसी कारणवश यह स्वीकृत नहीं हो पाया था। इसलिए पुनः इसका 202 लाख रुपए का आगणन पिछले 6 मई को शासन को भेजा जा चुका है।  जैसे ही शासन से स्वीकृति प्राप्त होती है तत्काल इसका निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा । मुझे लगता है कि कोरोना की वजह से थोड़ा सा समय लग रहा है । लेकिन स्वीकृति की लाइन में है जैसे ही स्वीकृति मिल जाएगी काम शुरू हो जाएगा।







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