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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपयी को दी श्रद्धांजलि , यज्ञ व काव्यांजलि का किया आयोजन

रिपोर्टर - आनन्द कुमार सहारनपुर सहारनपुर - प्रखर पत्रकार, संवेदनशील कवि, वैदिक चिंतक, चरित्र की राजनीति के भीष्म पितामह व पू...

रिपोर्टर - आनन्द कुमार
सहारनपुर











सहारनपुर - प्रखर पत्रकार, संवेदनशील कवि, वैदिक चिंतक, चरित्र की राजनीति के भीष्म पितामह व पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी बाजपेई को बेरी बाग स्थित मोक्षायतन योग संस्थान मुख्यालय में आज उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि , यज्ञ और अंताक्षरी के रूप में आयोजित अनूठी काव्यांजलि के द्वारा स्मरण किया गया। जिसमे लॉकडाउन को देखते हुए मोक्षायतन अन्तर्राष्ट्रीय योगाश्रम, नेशन बिल्डर्स एकेडमी व राष्ट्र वंदना मिशन से जुड़े केवल चुनिंदा लोगों को ही शामिल किया गया। वैदिक यज्ञ में मुख्य रूप से ऋग्वेद से गायत्री व राष्ट्रीय प्रार्थना मंत्र से आहुतियां दे कर अटल जी के सपने के सशक्त भारत अखंड भारत संगठित भारत के लिए प्रार्थना की ग‌ई। इस अवसर पर आयोजित काव्यांजलि का शुभारंभ योग गुरु पद्मश्री स्वामी भारत भूषण द्वारा अटल बिहारी वाजपयी के प्रथमाक्षर अ से आरंभ उनकी उस रचना से किया गया जो उन्होंने चुनौतियों से जूझ रहे अटल बिहारी वाजपयी जी के प्रथम बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने से पूर्व उन्हें दी थी। उन्होंने अपनी रचना की कुछ इस तरह शुरुआत की
"अटल मत होना कभी निराश
बड़ा ही विस्तृत यह आकाश
उडो तुम नभ मे लिए तरंग
लगाकर सत साहस के पंख
चरण चूमेगा नव उत्कर्ष
गति मत होने देना मंद।"
योगाचार्य अनीता शर्मा ने अटल जी की रचना "काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूं, गीत नये गाता हूं " का सस्वर पाठ किया।
 डॉ अशोक गुप्ता ने गोपाल दास नीरज की लोकप्रिय रचना "हम नहीं उनमें हवा के साथ जिनका साज़ बदले, साज़ ही केवल नहीं आवाज और अंदाज बदले" सुना कर अटल जी की दृढ़ इच्छा शक्ति को सराहा। मंजू गुप्ता ने "विनय न मानत जलधि जड़ गए 3 दिन बीत, बोले राम सकोप तब भय बिन होय न प्रीति" का पाठ करके अटल जी के नेतृत्व में भारत के सशक्तिकरण के लिए किए गए पोखरण परमाणु परीक्षण को याद किया! साधक सौरभ ने देश भक्ति गीत "देश मेरे.. "की प्रस्तुति से कारगिल विजय को याद किया! अंताक्षरी में भाग लेने वालों में ध्यान प्रमुख विजय सुखीजा, सुमन्यू सेठ, आदिति अग्रवाल, रामतीर्थ, आयुषी अग्रवाल, पार्थ गेरा, जतिन चावला वह खुशबू आदि शामिल रहे। अपने अध्यक्षीय संबोधन में पद्मश्री भारत भूषण ने काव्यांजलि के इस नए तरीके की सराहना करते हुए कहा कि इससे नए साधकों को भी काव्य कला से जुड़ने का उत्साह मिलेगा।उन्होंने अटल जी के जीवन उनके साथ अपने अनुभवों को लेकर अनेक संस्मरण सुनाए और बताया कि अपने विद्यार्थी जीवन काल से ही वह अटल जी के व्यक्तित्व, वेश व वाणी से प्रभावित रहे उन्होंने अटल जी को वक्तृत्व कला के महारथी के रूप में देखा लेकिन गर्व की बात यह है कि जब पहली बार अटल बिहारी बाजपेई से उनकी भेंट शिमला कार्यक्रम में हुई तो वह वक्ता थे और अटल जी श्रोता। उन्होंने बताया कि हंसमुख अटल जी किसी भी बात में चुटकी लेने से नहीं चूकते थे लेकिन उनकी पैठ और उनके शब्दों की पकड़ हमेशा गहरी होती थी। अटल जी हमेशा अपनी साहित्य सेवा, देश प्रेम नेतृत्व क्षमता, संसदीय मर्यादा और चरित्र की राजनीति के लिए देश के प्रेरणा स्रोत बने रहेंगे।





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