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स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं और गर्व कर रहे हैं कि आज हम आजाद हैं किसी भी प्रकार की बेड़ियां हमारे कदमों में नहीं डली है

  आज हम स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं और गर्व कर रहे हैं कि आज हम आजाद हैं किसी भी प्रकार की बेड़ियां हमारे कदमों में नहीं डली है लेकिन क्या आ...

 



आज हम स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं और गर्व कर रहे हैं कि आज हम आजाद हैं किसी भी प्रकार की बेड़ियां हमारे कदमों में नहीं डली है लेकिन क्या आप जानते हैं हमें आजाद करने के लिए हमारे पूर्वज, लोगों ने और उस समय के भारतीयों सैनिकों ने कितनी कुर्बानियां दी है। अगर नहीं जानते तो आज हम आपको बताएंगे कि किस तरीके से सन 18 57 में हिंदुस्तान आजाद हुआ और मेरठ जनपद से स्वतंत्रता की अलख कैसे जगी, बने रहिए हमारे साथ.......



दरअसल जिस वक्त हिंदुस्तान में ब्रिटिश हुकूमत राज कर रही थी, और ब्रिटिश लोगों ने बादशाह शाह जफर की तमाम सल्तनत को कब्जा लिया था और अपना परचम लहरा दिया था, लेकिन काफी दिनों तक हिंदुस्तान ब्रिटिश हुकूमत की जद में रहा, तमाम शहीदों ने ब्रिटिश हुकूमत से निजात पाने के लिए कोशिशें की और अपनी कुर्बानिया दी, जहां मेरठ में भारतीय   सैनिकों ने सबसे पहले विद्रोह किया, शहीद मंगल पांडे के बाद  ब्रिटिश हुकूमत में  सैनिक रहे भारतीय  ने  मेरठ में विद्रोह शुरू कर दिया ।


बंगाल में जैसे ही शहीद मंगल पांडे ने मास लगे कारतूस चलाने से इनकार किया तो उन्हें सजा ए मौत दे दी गई, लेकिन यह संदेश देश भर में फैला और मेरठ में ब्रिटिश हुकूमत में भर्ती 90 हिंदुस्तानी सैनिकों में से 85 सैनिकों ने चर्बी लगे कारतूस चोको योग में लाने से इनकार कर दिया,

 जिसके चलते सभी 85 सैनिकों का भारतीय सैनिकों के सामने ही कोर्ट मार्शल किया गया और उन्हें मेरठ की विक्टोरिया पार्क जेल में डाल दिया गया, उधर मेरठ के बाबा औघड़नाथ मंदिर में पुजारी नौजवानों को समझाते थे और ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ विद्रोह करने के लिए प्रेरित करते थे धीरे-धीरे मेरठ के आम लोगों ने विद्रोह शुरू किया और सदर बाजार इलाके में मारकाट शुरू कर दी यहां मेरठ के आम नागरिकों ने ब्रिटिश सरकार के नुमाइंदों सैनिकों को पीटना शुरू किया तो भारतीय सैनिकों के दिल का जज्बा भी जग गया और उन्होने ने भी इस में भाग लेना शुरू कर दिया जो ब्रिटिश हुकूमत में काम कर रहे थे और  मेरठ के वो सैनिक इतने उग्र हो गए कि उन्होंने न केवल ब्रिटिश सैनिकों को मारा बल्कि विक्टोरिया पार्क जेल से अपने सभी 85 सैनिकों को रिहा करा लिया और फिर दिल्ली के लिए कुच कर गए दिल्ली में जाकर फतह हासिल हुई और एक बार फिर मुगल साम्राज्य के आखिरी बादशाह जफर को देश का बादशाह घोषित किया गया..... 





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