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बाढ़ का ख़तरा।

रिपोर्ट--लोकेन्द्र चौधरी/बिजनौर/9837981497 पहाड़ों में मैदानी इलाकों में बारिश के दौरान गांव में बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। जिसको लेक...



रिपोर्ट--लोकेन्द्र चौधरी/बिजनौर/9837981497


पहाड़ों में मैदानी इलाकों में बारिश के दौरान गांव में बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। जिसको लेकर ग्रामीण कई वर्षों से चिंतित है। लेकिन अभी तक किसी भी शासन प्रशासन ने ग्रामीणों की समस्या का समाधान नहीं कराया है। आलम यह कि गंगा रोज कटान कर गांव के नजदीक पहुंच रही है। जिससे ग्रामीणों की रातों रात की नींद हराम हो गई। फिलहाल ग्रामीणों में गंगा का जलस्तर बढ़ने से  बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।

यह तस्वीरें हैं बिजनौर के खादर इलाके के गांव कुंदनपुर की जहां पर हर वक्त दर्जनभर गांव में बाढ़ का खतरा बना रहता है। आपको बता दें कुंदनपुर गांव जनपद का एकमात्र पहला ऐसा गांव है। जहां पर महाभारत के समय का एक मंदिर आज भी समान हालत में बना हुआ है। यह गांव किसी पहचान का मोहताज नहीं है। ग्रामीणों ने बताया कि यह गांव 20 वर्षों के अंदर गंगा के कटान के कारण तीसरी जगह बसा हुआ है। गंगा ने ऐसी बर्बादी मचाई की दो बार पुरा गांव गंगा में समा गया जनपद का यह गांव बर्बादी की एक ऐसी मिसाल है। जिसको सुनकर किसी की आंख में भी आंसू आ जाए। ग्रामीणों ने अपना दर्द बयां करते हुए। बताया कि हमारे पास कई हजार बीघा ऊपजाऊ जमीन थी। जो सब गंगा में समा गई। बाकी बची जमीन उत्तराखंड के भू माफियाओं ने कब्जा रखीं है। दर-दर की ठोकरें खाकर अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं। फिलहाल सिंचाई विभाग द्वारा दी गई। जानकारी के अनुसार गंगा में 28000 क्यूसेक पानी चल रहा है। खतरे से 2 मीटर पानी   ऊपर चल रहा है।





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