Skip to main content

नशा मुक्ति केंद्र में परोसी जाती है शराब







नशा समाज की बुराई है लेकिन ये सच्चाई भी है कि यह हमारे समाज में बहुत अच्छी तरह से जड़ें जमा चुका है, आप छोटे गाँव, कस्बे या किसी महानगर, कहीं भी रहते हों आप को नशे से होने वाले दुष्परिणामों की झलक अपने आस-पास ही देखने को मिल जायेगी, स्कूल-कॉलेज दफ्तर बाजार कोई भी जगह इससे बची नहीं है, ये एक ऐसी बिमारी है जिसमे न केवल एक व्यक्ति बल्की पूरा घर-परिवार तबाह हो जाता है, सर्वप्रथम नशा सेहत के लिये खराब तो होता ही है साथ ही यह पारिवारिक कलह और पैसों की बर्बादी के लिये जिम्मेदार होता है, हम अपने लिये, अपने परिवार के सदस्य या जिसको भी हम चाहते हैं उसकी नशे की लत छुड़ाने के लिये लाख जतन करते हैं। उसी में से एक अच्छा विकल्प है, नशा मुक्ति केंद्र
 लेकिन कुछ नशा मुक्ति केंद्र ऐसे भी हैं जिनके बारे में आप सुनकर दंग रह जाएंगे, सरकार द्वारा जहां नशे की लत को छुड़वाने के लिए नशा मुक्ति केंद्र आश्रम बनवाए गए हैं, वहीं कुछ लोगों ने अब नशा मुक्ति केंद्र आश्रम को कमाई का जरिया बना लिया है,
नशा मुक्ति केंद्र आश्रम में नशा छुड़वाने के लिए लाए गए लोगों से वसूली जाती है मोटी रकम,
और नशा मुक्ति केंद्र में आए नशा छुड़वाने के लिए लोगों को रखा जाता है ताले में बंद कर - कर और दवाई के नाम पर सिर्फ दी जाती है लीवर 52, सहारनपुर के थाना सदर बाजार क्षेत्र के दिल्ली रोड पर आरोग्य जीवन नशा मुक्ति केंद्र खुद ही है बीमार और नशे का है आदि,शाम होते ही नशा मुक्ति केंद्र पर पिलाई जाती है शराब देर रात भी शराब पीकर नशा मुक्ति केंद्र के स्टाफ में हुआ विवाद,शराब पीकर नशा मुक्ति केंद्र पर स्टाफ के ही कर्मचारियों ने एक कर्मचारी को जमकर पीटा,
पिटाई हुवे कर्मचारी के परिजनों ने नशा मुक्ति केंद्र पर जमकर किया हंगामा, कर्मचारी के परिजनों ने नशा मुक्ति केंद्र पर लगाए गंभीर आरोप और वही नशा मुक्ति केंद्र को बताया पूरी तरीके से फर्जी,
पूरा मामला सहारनपुर के थाना सदर बाजार क्षेत्र के दिल्ली रोड आरोग्य जीवन नशा मुक्ति केंद्र का है,  जहां पर देर रात स्टाफ कर्मचारियों में दारू पीकर शराब पीकर विवाद हो गया था जिसमें कर्मचारियों ने अपने ही स्टाफ के एक कर्मचारी को बुरी तरह पीटा सुबह होने पर परिजनों ने नशा मुक्ति केंद्र पर जमकर हंगामा किया और नशा मुक्ति केंद्र पर आरोप लगाते हुए बताया कि यह नशा मुक्ति केंद्र पूरी तरीके से फर्जी है जिसका रजिस्ट्रेशन भी नहीं हुआ है मही जब इस बारे में नशा मुक्ति केंद्र के देखरेख करने वाले स्टाफ मैनेजर से इस संबंध में बात की गई तो उसका भी यही कहना था कि अभी तक सहारनपुर जिला चिकित्सालय द्वारा हमें ऑथराइज लेटर नहीं दिया गया है, और वही जब नशा मुक्ति केंद्र में आए मरीजों से बात की गई कि उनको किस तरह का यहां पर ट्रीटमेंट मिल रहा है तो उनका भी यही कहना था कि सिर्फ हमें लीवर 52 की दवाई दी जा रही है और अभी इसके अलावा और कुछ नहीं दिया जा रहा है,
............ आइये जानते हैं इनके काम करने का तरीका।

हमारे देश में कई तरह के नशा मुक्ति केंद्र मौजूद हैं, इनकी महीने की फीस लाखों से लेकर कुछ हजार तक है। सबसे पहले हमे ये समझना होगा की नशा अलग-अलग प्रकार का होता है और समूचे देश में एक तरह की जलवायू नहीं है। आइये जानते हैं उन प्रक्रियाओं को जो सामान्य रूप से सारे प्रमाणित नशा मुक्ति केंद्र या रीहैब सेंटर अपनाते हैं।

विथड्रॉवल पीरियड – सबसे पहले हें ये समझना होगा कि कोई भी व्यक्ति जो नशे का आदि हो चुका है उसके लिये शुरुआत के दिन कठिन होते हैं। इसकी वजह ये है कि नशा करने वाले व्यक्ति का शरीर नशे के पर्दाथ का अभ्यस्त हो चुका होता है। इसके कारण मरीज को भूख न लगना, शरीर में कंपन, नींद न आना आदि समस्या का सामना करना पड़ता है। विथड्रॉवलपीरियड के दौरान नशा मुक्ति केंद्र या रीहैब सेंटर के स्टाफ द्वारा मरीज का पूरा ख्याल रखा जाता है और मरीज को तकलीफ से उबारने के लिये जरुरत के हिसाब से दवाईयां भी दी जाती हैं। यह पिरीयड 1 सप्ताह से लेकर 20-25 दिन तक का हो सकता है, इसकी अवधि नशे के प्रकार और सेवन की मात्रा पर निर्भर करती है।
रुटीन में लाना – जब मरीज के अंदर से विथड्रावल के लक्षण खत्म हो जाते हैं उसके बाद धीरे-धीरे स्टाफ की मदद से मरीज को केंद्र के सामान्य रुटीन में लाया जाता है। इस रुटीन में योगा, ध्यान, व्ययाम, समय पर भोजन, मनोरंजक गतिविधियां, शेयरिंग मीटिंग आदि शामिल होती हैं। शेयरिंग मीटिंग में मरीज अपने नशे से जुड़े अनुभवों को दूसरे साथियों के साथ बांटता है जिससे मरीज का मन हल्का होता है और इस रुटीन की मदद से मरीज के स्वास्थ में सुधार होता है। 
मनोचिकित्सक से परामर्श और काउन्सलिंग – मरीज जब पूरी तरह रुटीन में आ जाता है तब केंद्र के मनोचिकित्सक मरीज का आकलन करते हैं। कुछ मरीजों की समस्या के लिये दवाईयां लिखी जाती हैं जो समय अनुसार स्टाफ द्वारा मरीज को दी जाती हैं। इसके अलावा नशा मुक्ति केंद्र के काउन्सलर सामुहिक और व्यक्तिगत क्लाँसेज लेते हैं और मरीज का आकलन करते हैं। काउन्सलर और मनोचिकित्सक समस्याओं को सुलझाने के लिये जरुरत पड़ने पर मरीज के परिवार के भी संपर्क में रहते हैं। साथ ही प्रत्येक मरीज का मनोबल बढ़ाते हैं।
केंद्र का वातावरण – नशा मुक्ति केंद्र या रीहैब सेंटर में सभी वर्ग के मरीज भर्ती होते हैं इसलिये केंद्र के स्टाफ को इस बात का विषेश ध्यान रखना पड़ता है कि पूरे केंद्र का माहौल और अच्छा बना रहे तथा किसी के व्यवहार से तकलीफ न हो। स्टाफ को इस बात का भी गौर करना होता है कि कोई मरीज दूसरे मरीज पर नकारात्मक प्रभाव तो नहीं डाल रहा है। 
मरीज की जिम्मेदारीयां – पूरा स्टाफ हर मरीज की प्रगति पर ध्यान रखता है। जो भी मरीज बेहतर प्रोगरेस दिखाता है उसके हाथ में थोड़ी बहुत केंद्र की जिम्मेदारीयां दी जाती हैं जिससे उनका मनोबल बढ़ता है और अन्य मरीजों का भी आत्मविश्वास बढ़ता है।
पूरे देश में नशा मुक्ति केंद्र और रीहैब सेंटर खुले हुये हैं। ये जरुरी नहीं की हर नशा मुक्ति केंद्र या रीहैब सेंटर यही तरीका अपनाता हो। कई सेंटर ऐसे भी हैं जिनमे फर्जी या बेढ़ंगे तरीके से काम किया जाता है। इसलिये यह बहुत जरुरी हो जाता है कि आप अपने परिवार के सदस्य के लिये या अपने लिये किसी नशा मुक्ति केंद्र का चुनाव करें तो अच्छी तरह से केंद्र के बारे में जानकारी पता कर लें। नशा मुक्ति केंद्र में कैसे रखा जाता है, नशा मुक्ति केंद्र में क्या होता है।







ब्यूरो रिपोर्ट-शमीम अहमद सहारनपुर

Comments

Popular posts from this blog

रिजवान की मौत में आया नया मोड फैमिली डाक्टर अब्दुल हकीम ने बताया

टांडा कोतवाली क्षेत्र में रिजवान की मौत में आया नया मोड फैमिली डाक्टर अब्दुल हकीम ने बताया की 18अप्रैल को रिजवान की फुफी ने बताया की बाइक से गिरने से लगी है चोट जिसकी जिला अस्पताल में इलाज के दौरान  संदिग्ध  परिस्थितियों  में  हुई  22 वर्षीय युवक  के   मृत्यु  के   मामले  में मृतक के  पिता ने पुलिस की पिटाई के कारण मृत्यु होना बता कर पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की तहरीर दिया है। 

मौके का पुलिस अधीक्षक आलोक प्रियदर्शीएवं अपर पुलिस अधीक्षक अवनीश कुमार मिश्र ने निरीक्षण कर  जांचोपरांत कार्यवाही का आश्वासन दिया। पुलिस ने जहाँ पुलिस द्वारा  मारना पीटना बताया गया है ।उस घटनास्थल के आस पास लगे सीसी कैमरे  के फुटेज का निरीक्षण किया ।जिसमें किसी भी प्रकार की मार पीट की घटना दिखाई नही दे रही है । बैरहाल पुलिस हर बिंदुओं पर जांच कर रही है। शव का पोस्टमार्टम होने के बाद सुरक्षा व्यवस्था के बीच शव को मृतक के परिजनों को सौंप दिया गया। जिसके बाद बाद नमाज मगरिब शव को सलार गढ़ कब्रिस्तान में सुपुर्द ए खाक कर दिया गया। प्रशासन द्वारा सुपुर्द ए खाक में सीमित ही लोगों को जाने की अनुमति दी गई। इस मौके …

टाण्डा तहसील के शहर के नेहरू नगर मे 5 साल की बच्ची तृषा की रिपोर्ट आई पाज़िटिव

टाण्डा तहसील के नेहरू नगर में एक 5 साल की बच्ची तृषा पुत्री दिनेश कनौजिया करोना पाज़िटिव आई है। यह लोग मुंबई से चलकर इलाहाबाद आए थे ट्रेन से ।वहां से बस के द्वारा अकबरपुर आए थे। बच्ची को बुखार था प्राथमिक की स्क्रीनिंग में बच्चे को वहीं पर कोरंटाइन करा दिया गया था यह लोग 24 तारीख को यहां पर आए थे मौके पर टाण्डा एसडीएम अभिषेक पाठक व टाण्डा सीओ अमर बहादुर पहुंच कर एरिया को किया सील और लोगों से दूरी बनाने की अपील किया उसके बाद सीलिंग की कार्रवाई प्रारंभ होगी




यूपी के टॉप मोस्ट अपराधियों की बनाई गई लिस्ट

यूपी के टॉप मोस्ट अपराधियों की बनाई गई लिस्ट.

डीजीपी मुख्यालय ने बनाई 33 टॉप मोस्ट अपराधियों की लिस्ट.
लिस्ट में मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद, ब्रजेश सिंह समेत 33 अपराधियों के नाम.

उत्तर प्रदेश में फिर शुरू होगा ऑपरेशन  क्लीन