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बागपत की रेणु दीदी के बुने खाट और पिढो पर बैठते है बॉलीवुड के नामचीन कलाकार

रिपोर्ट, वीरेंद्र तोमर बागपत परिस्तिथियाँ जब प्रतिकूल होती है तो नए रास्ते खुलते है और ये ही रास्ते कामयाबी की ओर ले जाते है कठिन हालातो में...




रिपोर्ट, वीरेंद्र तोमर बागपत




परिस्तिथियाँ जब प्रतिकूल होती है तो नए रास्ते खुलते है और ये ही रास्ते कामयाबी की ओर ले जाते है

कठिन हालातो में परिवार को संभालने के लिए खाट और पिढ़ी बुनने का काम शुरू करने वाली बागपत की रेणु ने अपनी मेहनत के दम पर आज कामयाबी की नई इबारत लिख दी है

दरअसल आपको बता दे कि बागपत की बड़ौत तहसील के गांव गुराना की रहने वाली रेणु ने सरकारी अनुदान योजनाओं के माध्यम से खाट और पिढ़ी बुनने का काम शुरू किया और देखते ही देखते रेणु का काम चल निकला और वक्त के साथ दूर दूर तक रेणु के बुने खाट और पिढ़ी की शोरहत फैलने लगी

बागपत की प्रसिद्ध शूटर दादियों चंद्रो और प्रकाशी देवी की बायोपिक *सांड की आंख* में बॉलीवुड के कलाकार  रेणु के बुने हुए पिढो और खाट पर ही बैठ कर शूटिंग करते नज़र आये

रेणु बताती है कि पिता के बीमार होने के बाद घर की माली हालत बहुत खराब हो गयी थी तब आठ भाई बहनों में बड़ी रेणु ने खाट और पिढ़ी बन कर ना सिर्फ घर का खर्चा चलाया बल्कि अपनो भाई बहनों की शिक्षा भी पूरी कराई

आज रेणु करीब 10 स्वयं सहायता समूहों में नियमित प्रशिक्षण देती है गांव की महिलाओं के लिए अब रेणु सिर्फ स्वयं सहायता सखी नही बल्कि रेणु दीदी बन चुकी है

दर्जनों महिलाये रेणु दीदी से प्रशिक्षण ले कर आत्म निर्भर बन चुकी है


आज रेणु की बनी खाट और पीढ़ियों का चर्चा दूर दूर तक होना शुरू हो  गया है

और रेणु महिला सशक्तिकरण की जिंदा मिसाल बन गयी है





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